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सलाद से टमाटर और थाली से नदारद होने लगी सब्जियां
उज्जैन । बारिश की खेंच से सब्जियों ने आंखें तरेरना (दाम बढऩा) शुरू कर दिया है। पहले प्याज ने लोगों को रूलाया था लेकिन अब टमाटर लोगों को रूला रहा है। टमाटर के भाव तिगुने होकर 100 रुपए प्रतिकिलो पहुंच गए हैं।
वहीं भिंडी, गिलकी, गोभी सहित अन्य सब्जियों के दाम भी इजाफा होने से आम आदमी की थाली से गायब हो रही है।गनीमत है कि आलू और प्याज के दाम १० से १५ रुपए किलो ही है जिससे गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों की थाली में सब्जी को जगह मिल रही है।
शुक्रवार को आलू, प्याज, बैंगन, पालकर को छोड़कर अन्य सब्जियां दोगुने तो टमाटर तिगुने भाव पर बिका। चिमनगंज स्थित सब्जी मंडी के व्यापारी मुकेश निर्मल पडिहार ने बताया शहर में महाराष्ट्र के नारायण गांव, कोटा, अजमेर, बूंदी, नया बड़ागांव, चौमू (जयपुर) और गुजरात से टमाटर बिकने आ रहा है। अभी आवक कम होने से रोज ४०० से ५०० कैरेट टमाटर शहर पहुंच रहा है, जबकि आम दिनों में इनकी आवक १००० से २००० कैरेट होती है। एक कैरेट में २५ किलो टमाटर आते हैं। बीच में आवक अच्छी थी लेकिन महाराष्ट्र में काफी बारिश होने से काफी टमाटर खराब हो गया है। वर्तमान में आवक कम होने से टमाटर की कीमतों में तेजी आ गई है। हालांकि कल के मुकाबले आज भाव में आंशिक कमी रही। गुरुवार को १२०० रुपए कैरेट बिका टमाटर आज ९०० रुपए बिका। सब्जी विक्रेता राजेश महावर एवं शिवलाल ने बताया सब्जियों की आवक में कमी हो गईहै।
राजस्थान का देशी स्वाद में अच्छा
मंडी में अभी मप्र का टमाटर नहीं आ रहा है। प्रदेश का टमाटर दिसंबर से मार्च तक आता है और महाराष्ट्र का टमाटर मई से दीपावली तक आता है। मप्र का टमाटर हाईब्रिड होता है, जबकि राजस्थान से देशी टमाटर आते हैं। खाने में देशी टमाटरों का स्वाद अच्छा होता है।